रोमांचक होने के साथ-साथ बेहद चुनौतीपूर्ण हैं – गर्भावस्था का ‘चालीसवां हफ़्ता’

आमतौर पर चालीसवें सप्ताह को गर्भावस्था का अंतिम दौर भी कहा जाता है.गर्भवती महिला के लिए यह हफ्ता जितना रोमांचक होता है उतना ही चुनौतिपूर्ण भी क्योंकि अब बच्चा कभी भी इस दुनिया में अपनी नन्ही आंखें खोल सकता है.लेकिन कभी-कभी डिलीवरी का समय चालीसवें हफ्ते से ज्यादा हो जाएं तो ऐसे में तुंरत डॉक्टर से संपर्क करें. img इस लेख के जरिए जानिए गर्भावस्‍था के चालीसवें हफ्ते के बारे में.

  • गर्भावस्था के चालीसवें हफ्ते में होने वाले शारीरिक बदलाव

  • गर्भाशय से स्त्राव

अगर इस दौरान आपकी योनि से भारी मात्रा में रक्त या भूरे रंग का स्रव होने लगे तो यह भी डिलीवरी होने का स्पष्ट संकेत होता है.
  • संकुचन

अगर आपको जब लगातार और थोड़ी-थोड़ी देर पर गर्भ की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होता है तो यह संकुचन की स्थिति होती है. लेकिन जब यह अधिक समय तक तीव्रता से होता है तो यह लेबर पेन का संकेत होता है.और यदि आपको 10 मिनट में दो से तीन बार संकुचन (कॉन्ट्रेक्शन) होता है तो इसका मतलब यह है कि अब डिलीवरी का समय नजदीक आ चुका है और आपको बिना देरी किए जल्द से जल्द हॉस्पिटल के डिलीवरी रूम में पहुंच जाना चाहिए.
  • पानी की थैली का फटना

गर्भ में शिशु एक तरल पदार्थ की थैली में सुरक्षित रहता है और जब प्रसव पीड़ा होती है तो यह थैली फट जाती है ऐसे में योनि से एमनियोटिक द्रव का रिसाव होना शुरु हो जाता है. इस थैली के फट जाने का मतलब होता है कि शिशु अब गर्भ से बाहर आने के लिए पूर्ण रुप से तैयार है
  • संतुलित आहार

गर्भवती महिला को खाना पचाना मुश्किल होता है, ऐसे में जीरा खाना लाभदायक हो सकता है.दरअसल जीरे में भरपूर मात्रा में आयरन होता है जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है.वहीं, जीरा खाने से मां के शरीर में दूध बनता है और साथ ही साथ एसिडिटी और सूजन जैसी समस्याओं में भी काफी हद तक राहत मिलती है.
  • फिटनेस मंत्रा

सामान्य डिलवरी करवाने के लिए गर्भवती स्त्रियों को बद्ध कोणासन करना चाहिए. इस आसन से प्रसव पीड़ा कम होती है.

#माईलो टिप

यदि आपको इस हफ्ते के बाद भी लेबर पेन शुरू नहीं होते तो तनाव लेने की आवश्यकता नहीं हैं क्योंकि यह जच्चा-बच्चा दोनों के लिए हानिकारक हो सकता है. Feature image source  

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